Saturday, April 29, 2017

कुछ हंसी मज़ाक शायरी - 1

कुछ हंसी मज़ाक शायरी - 1


अपनी सेल्फी खुद ना लिया कीजये 
यह काम दूसरों को करने दीजिए

तेरी रुस्वाईयाँ ना होंगी कम
एक दिन मर जायँगे हम
हज़ारों गीत जो लिखे बैठे हैं
तेरे नाम कर जायँगे सनम
जीते जी तो ना घुस सके 
भूत बन कर आ जायँगे
तेरे घर मे तुझे सताएंगे हम
रातों को खटके होंगे
कभी रसोई मे टूटेंगी प्लेटें
और कभी नलके चलाएंगे हम
जिंदगी मे ना मिल सके तुझे 
मरकर तेरे साथ सेट हो जायेंगे हम


जबसे काट डाली उसके भाई की पतंग
तबसे हार गए हैं हम मुहोब्बत की जंग

लिख लिख कर गीत
भरे बैठे हैं हम बोरियां
हम तो घर से भी नहीं निकलते
आजकल हो रही हैं चोरियां 
5 रुपए का भी एक निकल जाय 
तो करोडोपती हो जायेंगे हम
कुछदिन और इंतज़ार करलो सनम

 पतंग साज़ हैं ना पतंग बाज़ हैं हम।
चौबारों के आशिक़ों के सरताज हैं हम।

उन्होंने आसमान के तारे मांगे
हम सीढ़ियां बांधने निकल गए

वो बिन मेकअप सामने  बैठे
हम इश्क का भूत भुला बैठे

फ़ोन -  -रिचार्ज हमसे 
इश्क--इज़हार गैरों से  

वो सुर मैं सुर मिला गए
गीत का भट्टा बैठा गए

गर इश्क मासूम होता
बन्दा हस्पताल ना होता  

सह ना सकेंगे हम इल्ज़ाम- -खोपड़ी 
हमारी अम्मा ने ये मक्खनों  से चोपड़ी   

उनकी बेवफाई पर हमने जरा ना की हाय
खत चूल्हे मे जला कर बना पी डाली चाय

कितनो को पीटा कितनो को घसीटा हमने
तेरे दिल तक आने का रास्ता बनाया हमने

हमने  काम किया ना आराम किया
इश्क़ में सफर--जिंदगी तमाम किया

जेल कचहरी  थाने में डरते हैं
तुम से नज़र मिलाने में डरते हैं

हम ज़ख़्म--दिल दिखने में लगते हैं
वह अपने गीत सुनाने में लगते हैं
सोच ते हैं भाग जाएँ यहाँ से
२० रूपये बस से जाने मैं लगते हैं 

हम घंटों ऑंखें बिछाये बैठे रहे 
वो छुपकर खिसक निकल गए


बैठे थे मोहोबत की सीट पर अकड़ कर 
उठा गए वो हमें कान से पकड़ कर

इस जहाँ मैं वफ़ा नहीं है सब कुछ ठोंक बजा कर देख लिया 
दर्दे इश्क़ कोई सुनता नहींरेडियो पर भी गा कर देख लिया

गमे इश्कों में जितने भी अश्क बहाएं हैं 
वह हमने कई बोतलों में भर के सजाएँ हैं

कभी किसी ने चुरा लिया कभी खुद से खो गया 
यह दिल आधा तीतर आधा बटेर हो गया |

कम्बखत जानेमन ने पता गलत बताया था 
और यह दीवाना सारा शहर छान आया था।

किसी भी शै की तोहीन नहीं सहते हैं हम 
पाजामे को भी पजामा नहीं कहते हैं हम ।

इलाजे ग़मे तन्हाई पूछा।
वो साथ रहने  गए।।

क्यों रेल से आने का वादा किया सनम
पूरा डब्बा घेर कर बैठे रहे हम
फिर क्यों बस से निकल गए तुम सनम 
और हर किसी से भिड़ते रहे हम

दीदारे इश्क़ पर जान सजा रक्खी है। 
उनकी गली मैं हमने दुकान लगा रक्खी है ।।

इश्क़ मैं तालीम काम ना आई बेकार सारे  ख्वाब गए |
हम सात MA करे बैठे थे वो प्लम्बर के साथ भाग गए ।।

ना आवाज ना दस्तक न सरसराहटये कौन आ गया है । 
हम देसी घी का हलवा बनाये बैठे थेये कौन खा गया है । ।

फेल हो कर भी दुनिया मैं जिए जाते हैं 
फटी किताबों से हम प्यार किये जाते हैं

बागों मैं आई बहारतुझपे शोखियां बेशुमार । 
धीरे बको सजनीतेरे सइयां को आया बुखार । ।

ए-दिल-बराए -जुल्फ शिकन दर शिकन से निकल । 
बहुत हुई जूते-बाज़ियां अब इन गलियों से निकल । ।


जो सितम ढाये तुमने 
हम गिन गिन कर बदला लेंगे 
गर अबके सनम इधर आएंगे 
 
उन्हें BSF वाली दाल खिलाएंगे

वो कहते तो रहते थे हम पर जान लगा देंगे 
एक कप चाय और समोसा ना खिला सके

अजीब था वो शख्स
तेरा दीवाना
धमकाया मार पीटा
पर फिर भी ना माना

हम आप के घर में बार बार आते।
गर आप BSF वाली दाल न खिलाते।।

वो बिन मेकअप सामने  बैठे
हम इश्क का भूत भुला बैठे

हम ज़ख़्म--दिल दिखने में लगते हैं
वह अपने गीत सुनाने में लगते हैं
सोच ते हैं भाग जाएँ यहाँ से
२० रूपये बस से जाने मैं लगते हैं 

तुमने आसमान के तारे मांगे
हम सीढ़ियां बांधने निकल गए
हम ऑंखें बिछाये बैठे रहे 
तुम छुपकर खिसक निकल गए
सारा दिन पानी बरसा
सारा दिन नाक बहा
हम तुम्हारी गलियों में  
तुम्हारे दीदार को खड़े रहे
हमसे फ़ोन रिचार्ज करवाते रहे
तुम गैरों के साथ निकल गए

कितनो को पीटा कितनो को घसीटा हमने
तेरे दिल तक आने का रास्ता बनाया हमने
जब जब हवा का झोंका आता है।
ये पजामा हमारा
झण्डे की तरह फड़फड़ाता है।
एक दिल ही काफी है
फड़फड़ाने को,
तड़फाने को     
पर इसका क्या अफसाना है
दिल तो दीवाना है
पर इसका क्या बहाना है
दिल तो बहल जायगा उनके आने पर
अब  इसको कैसे मनाना है



कोई उनसे कह दे
खामखाह न मुस्कराया कीजिए
हमारी मुश्किलें ना बढ़ाया कीजिए
वह तो मुस्करा देते हैं 
कइयों का दिल खो जाता है
हम पर करम कीजिये  
खामखाह न मुस्कराया कीजिए
कइयों को बहम हो जाता है
कितनो से भिड़ते हैं हम रात दिन
कितनो को पीटते हैं हम
और कितनो से पिटतें है हम
हम पर रहम कीजिए
खामखाह न मुस्कराया कीजिए

अपनी तारीफें हम खुद नहीं बयां करते हैं 
 
चमन के भूत भी हमको सलाम करते हैं।
कॉलेज की फीस से बुलेट खरीद लाएं हैं 
सारी जिंदगी मोहोब्बत के नाम करते हैं 
घर मैं पूरा मेकअप टेबल सेट किये बैठे हैं
हम तो बन ठन कर मुकाम करते हैं 
एक नहीं कई हसीनों को को पैगाम करते हैं

वो सुर में सुर मिला गए
गीत का भट्टा बैठा गए
इल्मे मौसिकी भगा गए
हम दाल बनाने बैठे थे
वो दाल का हलवा बना गए
सारा हमे खिला गए
हम खाट बिछाये बैठे थे
वो धम से आकर बैठ गए
चारों पाए लिटा गए
जब सनम सामने आ गए 
वो हाथ में बीड़ी पकड़ा गए
हम इश्क़ का चांस गवा गए।

मोहब्बत के खर्चो की बड़ी लंबी कहानी है,
कभी पिज़्ज़ा खिलाना हैं कभी फिल्म देखनी है
हम कॉलेज तो जाते है पर क्लास नहीं लगाते 
क्योंकि फीस तो सारी इश्क़ पर लगानी है
इतने बड़े सर मैं इतना बड़ा दिमाग है हमारा
पढ़ने लिखने मैं क्यों फालतू अक्कल घिसानी है
लोगों को बिना पढ़े ही बुलंदियों दिखानी हैं

तस्सुवर-ए-ज़ाना
बदलना पड़ेगा ठिकाना 
तुझे फ़ोन लगाना
भारी है फ़साना
पड़ता टंकी पर जाना
रोज सीढ़ी लगाना
अगर पावँ फिसला
मर जायगा दीवाना

हम कबाड़ी हैं कबाड़ी सनम
अपने डिब्बे बोतलें दे दे सनम
कागज़ भी ले जायँगे हम 
खुदा की कसम
दूसरों के साथ जो भी करें 
तुझे न धोका देंगे सनम
सब वादे निभेंगे हम
खुदा की कसम
तराजू चेक कर लेना
कहीं से भी तुलवा लेना
ठीक रेट लगायँगे सनम
खुदा की कसम 
हम मर्जी से बने हैं कबाड़ी सनम
हजारों जो गीत लिखे थे
उन्ही से धंधे में उतर गए हम
खुदा की कसम

तेरे घर के मुर्गे और मेरे घर के मुर्गे की
बोल प्रीतम बोल कुश्ती होगी की नहीं
कितने दिन से मेरा मुर्गा बेचारा कुछ नहीं खाता है
तेरे घर की और ये मुह कर बाँगें रोज लगता है
इसके मन का जोश कभी काम होगा की नहीं
बोल प्रीतम बोल कुश्ती होगी की नहीं
बड़े जतन से मैंने इसको काजू खिला कर पाला है
तेरा मुर्गा रिश्ते मैं लगता इसका साला है
इसके मन का बोझ कभी कम होगा की नहीं
बोल प्रीतम बोल कुश्ती होगी की नहीं

माना तुम जुकाम में
ओर भी हसीं लगती हो
फिर भी हमारी सलाह है जानेमन
ठंडी हवाकाली घटा
ऊपर से यह जाड़े का मौसम 
टोपी पहन कर निकला करो सनम
माना तुम जुकाम में 
ओर भी गुलाबी लगती हो
तुम्हारे चाहने वालें हैं हम
टोपी पहन कर निकला करो सनम
यह होठों का एक तरफ घुमाना
यह रुमाल का चेहरे को छुआना
इन अदाओं पर मरते हैं हम
टोपी पहन कर निकला करो सनम

एक दिन गर हम और तुम मिल जायँगे
तुम कपडे सुखाना हम बन्दर भगाएंगे
एक दिन गर ये रास्ते एक हो जायँगे
तुम्हारे कूचे में इतने धक्के खाये
हमारी मन्नत है यहीं हम लंगर लगाएंगे
एक न एक दिन दो दिल मिल जायँगे 
तुम गीत गाना हम तबला बजाएंगे
एक दिन सितारे मेहरबान हो जायँगे
मेरे हज़ारों गीतों मैं तुम्हारा हीअफसाना है
एक दिन ये गीत फिल्मों में लग जायँगे
एक दिन गर हम और तुम मिल जायँगे

जाने किसके मुकद्दर में होगा तुम्हारा दीदार 
किसे मालूम था यह दंगल इनामी हो जायगा
किसे मालूम था तुम्हारी गली में
तुम्हारा कोई चाहने वाला
रोज़ हमारा बुलेट पंचर कर जायगा
किसे मालूम था वक़्त नया गुल खिलाये गया
तुम्हे पाने की शिकस्त ही
हमारा धंधा हो जायगा।।

ज़िया बेकरार है 
दिल बजता तबलों की तरह 
ना जाने किसका इंतज़ार है
न दिन को चैन न रात को नींद
ये बुखार है या प्यार है
हस्पताल भी जा आये
टेस्ट सब ठीक आये
टॉनिक लाये चार हैं
ये बुखार है या प्यार है
जबसे उनसे मिली थी नज़रे
यह सिलसिला बकरार है
आया नहीं करार  है
ये बुखार है या प्यार है

तुमसे नज़रें मिलती हैं हम राह भूल जातें हैं
निकलते हैं दुकान को स्टेशन पहुंच जातें हैं
एक न एक दिन हम गाड़ी चढ़ ही जायँगे
बेटिकट पकडे जायँगे और अंदर हो जायँगे
अपनी बर्बादी का तुम पर इलज़ाम लगायँगे

गुज़रे हुए वक़्त का हमने न गिला किया
वक़्त ने बैंगन दिया हम भुरता बना खाये
सनम की शादी  में हम घुस गए बिन बुलाये
न सगुन दिया न शिकवा किया 
डट कर पनीर खाया और जशन किया
हमने अपने पेट पर हाथ फेरा और
खोपड़ी से मुहोब्बत को दफ़ा किया

मूंगफलियां आ गई बाज़ारों मैं
पतझड़ आ गई बहारों मैं
कब होगा मिलन 
लोग गाजर के हलवे बनाने लगे
मूली के परांठे खाने लगे 
कब होगा मिलन
हम सबसे पतंगें कटवाने लगे
बेसुरे गीत गाने लगे  
कब होगा मिलन
ये लंबी अकेली रातें
हमारी बेवजह हिलती लातें
कब होगा मिलन 

कभी जुल्फों की काली घटा मैं उलझ गए
कभी आँखों की नीली झील में डूब गए
हमने न काम किया ना आराम किया
इश्क़ में सफर-ए-जिंदगी तमाम किया
कॉलेज के रास्ते में थी हसीनो की गलियां
उन्ही गलियों में भाग निकला दिल हमारा
एक ही दिल है उसके बिना कहाँ गुज़ारा
हम इन्ही गलियों में दिल को ढूँढ़ते रहे
ये लगाता रहा हसीनो की गलियों में चक्कर
इस दिल ने हमें बना डाला घनचक्कर 

ज़रा भी हंगामे की भनक लगे
हम बिन ब्रेक दौड़ लगते हैं
तेरे कूचे मैं 
कहीं धुआं भी निकले 
फायरब्रिगेड से पहले पहुंच जाते हैं
तेरे कूचे मैं 
तलब है तेरे दीदार की
हर स्कीम लगते हैं
तेरे कूचे मैं
कोई दूसरा न मारने लग जाये ट्राई
इसलिए मंडराते हैं
तेरे कूचे मैं


कैसे जलाएं मुहोब्बत की शम्मा
इसे बुझा देती है तेरी अम्मा
तेरे गली में कदम रखते ही 
डंडा दिखा देती है तेरी अम्मा
अगर सपनों में भी आ जाये
नींदै भगा देती है तेरी अम्मा
बाजार में भी अगर मिलजाए
हमें धमका देती है तेरी अम्मा
लगता है रात को कांच की
बोतलें चबाती हैं तेरी अम्मा
कहाँ तेरी अदाएं और नज़ाकत
और कहाँ ये तेरी मिलिटेंट अम्मा


ये जिंदगी एक मोपेड हो गयी
जब पेट्रोल रहा इसमें
तो मोटरसाइकिल बन गयी  
जब पेट्रोल हुआ ख़तम
तो साइकिल हो गयी  
ये जिंदगी एक मोपेड हो गयी
जब पंचर हो गई तब धकेला पीटा
कभी ये हमें मंज़िल तक ले आई
कभी हम इसे घर तक घसीट लाये
कभी क्लच टूट गया
तो कभी चैन उत्तर गयी
ये जिंदगी एक मोपेड हो गई
कभी हम इस पर सवार
तो कभी ये हमारी गधाफेरी हो गयी 



टेम्पुओं की हड़ताल हो गयी
जिंदगी बेहाल हो गयी
हमने सनम की गलियों में
जाना नहीं छोड़ा
मीलों रोज चल चलकर
टांगें बुरा हाल हो गईं
गर अबकी बैठे
किसी चाय की दुकान पर
वही गिर जायँगे उठ नहीं पाएंगे
तुम्हारा नंबर मिलाएंगे
फ़ोन उठा लेना सनम
तुम्हारी आवाज़ ही
हमारा गुलूकोस होगी
हम फिर उठ जायँगे
फिर चले आएंगे
तुम्हारी गलियों में

लंबी रातें लंबे साये
ढोते ढोते बोझ हमारा
जख्मी हो गए खाट के पाये
तुम भी कंगले हम भी कंगले
दरमियान में क्यों ये आये जंगले
तुम्हारे याद में गीत बनाये
बोरियां भरकर ढेर लगाए

दो पल बैठो साथ
हमारे सर से सर जोड़ो आप 
ये वक़्त ठहर जाये
और नरियल और चमेली
दोनों तेलों की
खुशबुएँ एक हो जाएँ
दो पल बैठो साथ
हमारे सर से सर जोड़ो आप
शायद किसी नए
बिज़नस की स्कीम बन जाये
पिछली सारी फेल स्कीमों के
ज़ख़्म भर जाएँ 


इस मोहोब्बत की गाड़ी पटड़ी से उतरी सो उतरी
ताज्जुब है ये पटड़ी से इतनी दूर कैसे निकल आई
जिसकी खातिर हम साल दर साल फ़ेल होते रहे
वादा करके भी वो कुलचे की दुकान पर न आई
हम कितनो को पीटते और कितनो से पिटते रहे
वो किसी दूसरे के साथ बाजार में पिज़्ज़े खा गई



इस मुहोब्बत ने हमे मरीज़ बना डाला 
ये खोपड़ी हो चुकी जैसे एक गत्ता कारखाना
इसका काम हो गया हर शै की लुगदी बनाना
पर बजाये गत्ते के यहाँ गीत बनकर आने लगे
दिल के अरमान नगमे बन कर बह निकले 
हम कागज़ भरते रहे और गुनगुनाने लगे
जब कागजों के ढेर सारे घर में नज़र आने लगे
घरवाले इन्हें रद्दी के रेट उठवाने लगे
सदमे में हम गश खा खा कर होश गवाने लगे  
अपने दिमाग का इलाज़ डॉक्टरों से करवाने लगे

तुमने दिल में हमारी मूरत तो सजा रखी है
इसे रोज खोये का भोग न लगाया कीजिए
अपने फैलते जिस्म की परवाह चाहे न कीजिए
पर हमारे अरमानो पर कुछ रहम कीजिए

इश्क की गलियों में
फिर हुई घमासान
हम तो बचा भागे जान
पर 2000 रूपये की
पतलून हुई कुर्बान

खत सनम को लिखने बैठे
मसौदा बेशुमार हो गया
खतखत नहीं रहा
अख़बार हो गया
पुलिंदा जब उनके हवाले किया
उनको बुखार हो गया

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