कुछ हंसी मज़ाक शायरी - 2
तुम पिज़ा खिलने वालो के साथ मत जाना
हमारे साथ कुलचे खा कर गुज़ारा करना
हम तो ग़ुरबत मैं हैं, उम्र भर तुम्हे चाहेंगे
कोई भी गाड़ी ले आना पंक्चर फ्री लगाएंगे
तुम साथ चलो तो ग़ुरबत भी टल जायगी
दुकाने-पंचर pizza hut मैं बदल जायगी
अपनी रस्सी बांध डाली है तेरे दर पे
चाहे तू लाख पीटे हमे या घसीटे हमे
हम नहीं उतरेंगे बैठे रहंगे तेरे सर पे
हमारा ठिकाना हो गई है तेरी चौखट
चाहे करवा ले हमसे कुछ भी फोकट
न सोचते हैं दूर की न सुनते हैं दूर की हम
जब भी चलते हैं और जब रखते हैं कदम
अपने पावं से आगे निगाह नहीं करते हैं हम
फिर भी हम पत्थरों से टकरा जाते हैं सनम
सनम का खत देखा
हम मदहोश हो गए
मत सुनाया करो गीत
पड़कर हम बेहोश हो गए
तुमने ऐसा सर दुखाया
आज तक न काबू आया
अपने गीतों को आग लगादो
ज्यादा प्यार है तो इनकी राख
हरिद्वार की गंगा में बहा दो
अब दोराहे पर खड़े हम
इधर गीत उधर सनम
अब किधर जाएँ हम
हम नैन से नैन लड़ा बैठे
ख़ामख़ा हल्ला मचा बैठे
दस और थे उनके पीछे
दौड़ते जूता गवां बैठे
खतरे की घंटी बजा बैठे
ये आशिक़ों के मेले
तेरी गलियों में कम न होंगे
अब्सोस हम ना होंगे
अब सही एजेंट मिल गया
पहुंचा देगा अमरीका
रोज फ़ोन करेंगे
इंग्लिश में बातें होंगी
बदलेगी ज़िन्दगी ये
होंगी वहीं बहारें
उल्फत की यादगारें
आशिक़ों के मेले
तेरी गलियों में कम न होंगे
अब्सोस हम ना होंगे
बिगड़ेगी और चलेगी
दुनिया यहीं रहेगी
पहले थे धोके खाये
एजेंटों ने सताये
अमरीका हमे बोलकर
अफ्रीका में बिठाये
लुट पिट के लोट आये
ये आशिक़ों के मेले
तेरी गलियों में कम न होंगे
अब्सोस हम ना होंगे
अब सही एजेंट मिल गया
पहुंचा देगा अमरीका
जेबों में डॉलर होंगे
मेरा जनाज़ा किसी टेम्पू पर सजा देना लोगों
इसे मुहोब्बत की गलियों में घूमा देना लोगों
जिसकी हसरत में हमने लाख धक्के खाये
जिसकी गलियों में हमने बीसों जूते घिसाये
आखरी चक्कर भी फिर वहीँ लगवा देना लोगों
हमारे ज़िगर के टुकड़े हैं ये सारे गीत
ये कागज़ हमारे आंसुओं से लिपटे हैं
इनको हम डिब्बे में सजा रहें हैं
उसकी शादी का तोहफा बना रहे हैं
उनका मिज़ाज़ फिर धड़कन रोक गया
जैसे कोई गधा पेट में दुल्लती ठोक गया
इस इश्क़ ने दिए हमे झटके पर झटके
आसमान से गिरे और खजूर पर अटके
तुम हसीं हो रास्ते तुम्हारे कदम चूमते हैं
और हमारे आगे सारे फाटक बंद हो जाते हैं
तुम हसीं हो जिस दफ्तर मे भी तुम जाओ
तुम्हे सब सर आँखों पर बिठाते हैं चाय पिलाते हैं
हम एक खिड़की से दूसरी तक धक्के खाते हैं
फिर थक हार कर शाम को बैरंग घर आ जाते हैं
वो जिस घाट पर कपडे धोते हैं
वहीँ पर तमाम लफड़े होते हैं
सीने में जलन और
दिल में घबराहटों का है बसर
ये मोहोब्बत का है असर
या डेढ़ पाव हलवे का है हशर
किस किसको खिलायें पिज़्ज़े
किस किसका कराएं रिचार्ज
किसको को घुसाएं दिल मैं
किस को करें निकाल बाहर
गुज़रें किस किस की गली
छोडें किस किस की गली
हाय ये जुल्फें हाय ये होंठ
किस किस के भरें हम बिल
कलकत्ता हो गया है ये दिल
कभी खाली नहीं बैठते, हर वक़्त कुद्तें हैं हम
गर कील भी मिल जाय तो हथौड़ी ढूंढते हैं हम
उनसे शाम सब्जीमंडी में मुलाकात हो गई
आलू गोबी और भिन्डी के बारे में बात हो गई
वो चले गए पर उनके ख्यालों में रात हो गई
उनके हसरत ही हमारी कायनात हो गई
हम हसीनों की गलियों में चक्कर लगाने लगे
दूकान राम भरोसे हुई नौकर काजू खाने लगे
जबसे हुआ है हमे प्यार
उलझने हैं बेशुमार
अज़ीब अज़ीब हिचकियाँ
तो कभी सिसकियाँ
कभी रह जाते हैं प्यासे
कभी बाल्टी पानी पी जाते हैं
रोज रोज की जहालत
हो गई है ऊंठ सी हालत
अब हम तुमको कैसे समझायें सनम
न आवारा हैं और न बेरोजगार हैं हम
नेताओं के रिश्वत उगाहगार हैं हम
सीख रहें हैं हम लीडरी के रास्ते कदम
जब भी हमारा नंबर आ जाता है सनम
अटक जाते हैं एक इंच की कसर से हम
लीड़रों के बेटे ले जाते हैं बाज़ी जानेमन
गरदन झुका ली और मूंछ भी झुका ली
उल्फत के आगे हमने पूँछ भी झुका ली
चाहे हम व्यापारी हैं भैसों के
इंसान को भी पहचानते हैं
उनकी आँखों मैं लिखा है मुहोब्बत
पर वो नहीं मानते हैं
ऐसा लगा उनसे मिलकर
जैसे कोई खोई हुई
एक जुराब मिल जाये
और जोड़ा पूरा हो जाये
जैसे किसी बोतल का
ढक्कन मिल जाये
और बोतल काम आ जाये
जबसे मिलीं हैं निगाहें
जुबा पर हैं आहें
ये खोपड़ी चलने लगी
एक dynamo की तरह
ये दिल भाग निकला
फटफटिया की तरह
सोई मशीन जाग गई
हमारी नींद भाग गई
उनके रास्तों ठिकानों का
हमने सब पता लगा रखा है
और तो और इन रूटों का
बस पास भी बना रखा है
रिचार्ज करवाने का पैगाम आ गया
न जाने कितनो के नाम आ गया
फिर मेंढकी को जुकाम आ गया
या उम्मीदों को फिर आराम आ गया
हमने इज़हार-ए-उल्फत कर डाला
वो परवान न करें तो कैसे करवायें
हम घोड़े को पानी तक ले आये
ये पानी न पिए तो इसे कैसे पिलायें
अपना हाल तुम्हे क्या बतायें जनाबे आली
उल्फत ने उस गधे सी हालत कर डाली
जो अब चल नहीं सकता बे-बोझ या खाली
देखी उनके दर पर भीड़, हमने रख लिया दिल पर हाथ
हमारे प्यार में कहीं वो कुछ कर न बैठे हों खुद के साथ
पूछा तो पता चला वो तो भाग गए किसी पडोसी के साथ
अभी कल ही हमसे फ़ोन रिचार्ज करवाया है
और आज उसकी शादी का कार्ड आया है
बर्दाश्त कर चुके हम बिज़नसों के कई घाटे
पर मार डालेंगे आपके ये मिज़ाज़ ये धमाके।
हमे लोन नहीं मिला पर बिज़नस की बीसों स्कीम थीं
दिलदार भी नहीं मिला पर ज़माने में लाखों हसींन थीं
असली घी का हलवा बनायेंगे
सनम को फिर इधर बुलायेंगे
उन्हें बतायंगे और समझायेंगे
ऊपर से चाहे हम नज़र आते हैं
घोड़े की तरह मुस्तैद, पर
उन्हें दिल के जख्म दिखलायेंगे
मुहोब्बत का मुकाम फिर वहीं आ लटका
उन्होंने निगाहों से ही लगा दिया धोबी पटका
ये नींद हमारी खवाब तुम्हारे
ये खोपड़ी हमारी ख्याल तुम्हारे
कराते रिचार्ज तुम्हारा फ़ोन हरदम
फिर क्यों ये miss call तुम्हारे
तुमने जो टिंडे के बीज दिए हमने वो बोये
जब इनपर कद्दू निकले हम बहुत रोये
ये तुम्हारे लाल मिरचों जैसे होंठ और टमाटरों जैसे गाल
हमारे इश्क़ का है असर या कद्दू के रस का है कमाल
यहाँ हसीनों का मेला
ये दिल हुआ तबेला
तुम्हारी गली में जो धमाका हम पर फायर का था
वो दरअसल पटाखा हमारे अपने ही टायर का था
लिखे बैठे हैं हम नगमे
एक से एक जबरदस्त
कुछ वक़्त की देरी है
हो जायगा हमारा बंदोबस्त
जिसकी खातिर हमने ये मूछ बड़े जतन से पाली
वही कहगये जैसे खरबूजे पर लकीर खींच डाली
उसके तन बदन में हलवों सी खुशबू
हमारी सोई हुई भूख हो गई रूबरू
सनम वो जो पकोड़े तुमने चटकखारे लेकर खाये थे ।
वो हमने बेसन में अपने हीअश्क मिला कर बनाये थे।
वो हमने बेसन में अपने हीअश्क मिला कर बनाये थे।
छुप छुप रोते हो जरूर कोई बात है ।
बीबी ने बना दिया खोपड़ी का भात है।।
बीबी ने बना दिया खोपड़ी का भात है।।
जो गुलाब हमने सनम को दिलों जान से थमाये थे।
उन्होंने वो हमारे सामने ही बकरी को खिलाये थे।।
उन्होंने वो हमारे सामने ही बकरी को खिलाये थे।।
गर इश्क़ हुआ कामयाब तो
सनम को गाजरों से तुलवायंगे
हम खुद हलवा बनाएंगे
और सबको खिलायँगे
जब से है दिल में इश्क़ का तूफान
तभी से हो चूका परमानेंट ये जूकाम
जब से सनम का फ़ोन रिचार्ज करवाया है
उसे वक़्त से फ़ोन उनका बिज़ी आया है
चाय पर बुलाया था फर्नीचर उठवाया था
पेंट भी फट गई और सर भी टकराया था
वो कौन कहतें हैं बरसातों में उल्फतें जाग जातीं हैं
हमें तो नज़ला हो जाता है और छींके लग जातीं हैं
उसकी मांगनी किसी और से हो गई फटाफट
किताब-ए-उल्फत से हमारा पन्ना हो गया सफाचट्ट
उसकी शादी में बन ठनकर हम जायेंगे
जो इश्क़ में हुए खर्चे कुछ तो वसूल आयेंगे
इस दिल में अभी और भी जख्मो की जगह है
इस पेट में अभी और भी लड्डुओं की जगह है
कब ये पत्थर दिल पिघलेगा सनम
उम्र भर तुम्हारे पीछे आएंगे हम
तुम्हारी भैंस भी हमे चाहने लगी
खूंटा तोड़ हमारे पीछे आने लगी
इश्क़ में अब एक ओर ये नया पंगा हो गया
उसके कुत्ते पर हाथ फेरते थे वो गंज़ा हो गया
उसके कुत्ते पर हाथ फेरते थे वो गंज़ा हो गया
वो मंदिर घुसी हमने खुद को उसके पीछे लगा दिया
उसके साथ साथ हमने भी हर एक घंटा बजा दिया
हम दो भाई हमारे दो दुकान दो मकान सब बता दिया
कागज़ पर लिखकर अपना मोबाइल नंबर थमा दिया
उसके दीदार की मन्नत मांग हमने प्रशाद चढ़ा दिया
सारा दिन खिलाया और उसे सारी शाम घुमाया
जाते जाते कह गई, सुबह से कुछ नही खाया।
हमारी टांट पर जहां से आलू मारा था
वो उसका ही चोबारा था
होले होले हमारे दिल में आना, तुम जल्दी नहीं मचाना
रिचार्ज करवाते रहेंगे हरदम पर फालतू खोपड़ी न खाना
सनम आयंगे इधर हम उनके लिए भल्ले बना रहें हैं
कम्पीटीशन के जमाने में अपनी बुक्कत बड़ा रहें हैं
अभी तो सिर्फ दो ही जाम लगाए थे
हम पांच बन्दों के भी काबू न आये थे
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